सिकंदराबाद: सावन के प्रथम सोमवार पर प्राचीन श्री झारखंडेश्वर महादेव मंदिर में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। ब्रह्ममुहूर्त से ही हजारों श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक और दर्शन के लिए मंदिर पहुंचने लगे। पूरे मंदिर परिसर में “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष से भक्तिमय वातावरण बना रहा।
श्रद्धालुओं ने गंगाजल, दूध, बेलपत्र, भांग, धतूरा, पुष्प और अक्षत अर्पित कर भगवान शिव से सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली की कामना की। दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं, वहीं मंदिर प्रशासन और स्वयंसेवकों ने श्रद्धालुओं की व्यवस्था संभाली।
करीब 800 वर्ष पुराने श्री झारखंडेश्वर महादेव मंदिर को क्षेत्र की सनातन आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। मंदिर के पुजारी प्रवीण गिरी के अनुसार यहां स्थापित शिवलिंग स्वयंभू है, जो किसी मानव द्वारा स्थापित नहीं बल्कि स्वयं धरती से प्रकट हुआ था। मान्यता है कि प्राचीन समय में यह स्थान घने जंगलों से घिरा हुआ था, जहां भगवान शिव ने स्वयं प्रकट होकर भक्तों को दर्शन दिए। इसी कारण इस धाम का नाम झारखंडेश्वर महादेव पड़ा।
मंदिर से जुड़ी एक और विशेष मान्यता श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। जनश्रुति के अनुसार आज तक मंदिर के ऊपर शिखर (चोटी) का निर्माण पूर्ण नहीं हो सका, जिसे भक्त बाबा की दिव्य इच्छा मानते हैं। ऐसी भी मान्यता है कि जो श्रद्धालु लगातार 41 दिनों तक नियमपूर्वक बाबा के समक्ष अखंड ज्योत प्रज्वलित करता है, उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है।
स्थानीय श्रद्धालु संजय गिरी ने बताया कि उनका परिवार लगभग 450 वर्षों से बाबा झारखंडेश्वर की सेवा और पूजा-अर्चना से जुड़ा हुआ है। उनका कहना है कि बाबा के दरबार से आज तक कोई भी सच्चा भक्त खाली हाथ नहीं लौटा और यहां श्रद्धापूर्वक मांगी गई हर प्रार्थना भगवान शिव अवश्य सुनते हैं।
सावन मास में इस शिवधाम की रौनक और अधिक बढ़ जाती है। प्रतिदिन तीन से चार हजार श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंच रहे हैं, जबकि महाशिवरात्रि पर हरिद्वार, ऋषिकेश, गोमुख सहित विभिन्न तीर्थस्थलों से कांवड़िये गंगाजल लाकर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग, पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं, जिससे भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
धार्मिक आस्था, प्राचीन इतिहास और जनविश्वास का प्रतीक श्री झारखंडेश्वर महादेव मंदिर आज भी क्षेत्र के प्रमुख शिवधामों में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है। सावन के प्रथम सोमवार पर उमड़ी श्रद्धा की इस अनुपम धारा ने एक बार फिर बाबा झारखंडेश्वर के प्रति लोगों की अटूट आस्था को साकार कर दिया।



